Short Stories

जीवन में जैनत्व का महत्व

पं॰ गोपालदास जी बरैया अपनी पत्नी और बच्चे के साथ मुरैना से बम्बइ जा रहे थे। रास्ते में चर्चा चली कि आज बच्चा तीन वर्ष का हो गया। उसकी आज वर्ष गांठ थी। यह सूनकर पंडित जी ने कहा- जब बच्चा तीन वर्ष का हो गया तो इसका आधा टिकट खरीदना चाहिये था। यह मेरा अपराध है। बम्बइ में पहुँचकर  पं॰जी ने बाबू से कहा- यह बच्चा तीन वर्ष का हो गया है अतः इसके जुर्माने सहित टिकिट के पैसे ले लीजिये। यह सुनकर बाबू मैनेजर के पास उनको ले गया। मैनेजर यह देख सुनकर बोला – जैन लोग इतने ईमानदार होते हैं यह मुझे आज पता चला।

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