Short Stories

इतना जीवन में हो, वही जैन है

एक आध्यात्मिक संत जैनों की सभा में उपदेश दे रहे थे। एक सज्जन ने कहा- श्रीमान जी, लोगों के द्वारा जैनाचार का भी पालन नहीं  हो रहा है, आजकल पानी छानकर पीना, रात्रिभोजन त्याग, जिनेन्द्र दर्शन का भी नियम नहीं, तब सबसे पहले इनका उपदेश दीजिये।

संत ने कहा- जो जैन हैं, उसको तो इतना संस्कार में होता ही हैं। उसे इनका उपदेश देने की आवश्यकता नहीं। जो जैन कहलाये और ये तीनों सदाचार न पालता हो वह जैन कैसे हो सकता है?

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