Short Stories

होनहार सुनिश्चित है

गंगा के किनारे एक नाविक लोगों को नाव में बिठलाकर नदी के दूसरे घाट पर ले जाता था। उसका यही धंधा था। एक दिन गंगा की बाढ़ में नाव चलाते हुए उसके दो लड़के गंगा में बह गये थे। मैंने नाव बैठे-बैठे उससे पूछा – जब इसी गंगा की धारा में तुम्हारे दो लड़के डूब गये तो तुम्हें अपने डूबने का डर नहीं लगता? उसने भोलेपन से उत्तर दिया –  बाबू जी, जिसकी जब उमर खत्म होती है तभी वह मरता है। बीमारी के या डूबने के तो बहाने मिल जाते हैं। मैंने कहा- भाई बड़ी गहरी बात करते हो। वह कहने लगा-बाबू जी, सच्ची बात तो यही है।

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