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ईमानदारी

एक बार संभवतः बेंगलौर में किसी कॉलेज मे विज्ञान अध्यापक नियुक्त करना था। इंटरव्यू आदि के लिए कमेटी बनाई गयी। प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ सी॰वी॰ रमन उस कमेटी के अध्यक्ष थे। सबसे मुलाकाते और इंटरव्यू हो चुके। सब लोग डॉ सी॰वी॰ रमन का अभिवादन करके अपने घर लौट रहे थे, कि उन्होंने देखा – एक आदमी थोड़ी दूर पर खड़ा है। उन्होंने सोचा – यह जरुर कोई सिफारिशी चिट्ठी लाया है, वही देने का इंतजार कर रहा है। उन्होंने उस व्यक्ति को अपने पास बुलाया। पूछा, “क्या चाहते हो, जाते क्यों नहीं? सब लोग चले गए।”
वह आदमी संकोच करता हुआ बोला- “साहब, मुझे कुछ नहीं चाहिए और न मैं कोई सिफारिश लाया हूँ। मैं तो इसलिए रुका था कि मुझे इंटरव्यू में आने के लिये जो यात्रा भत्ता दिया गया है, वह गलती से अधिक दे दिया गया, मैं उसे लौटाने के लिए रुका था।” डॉ॰रमन उस आदमी की ईमानदारी से बहुत प्रसन्न हुए और उसे नौकरी मिल गई।

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