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विरोधी की सहायता

बम्बई के सुप्रसिद्ध समाज सुधारक मामा परामनंद लम्बे अर्से से बीमार चल रहे थे। उन दिनों बड़ौदा नरेष महाराज सम्भाजीराव गायकवाड को जब यह पता चला तो उन्होंने वार्षिक भेजना शुरु करवा दी। मामाजी का यह वृत्ति आने की परम्परा नहीं भाई। उन्होंने उसे लौटाते हुए महाराज को लिखा – मैं बीमार चल रहा हूँ, यह ठीक है। परन्तु मेरी आर्थिक स्थिति बहुत अधिक खराब नहीं है। मुझसे अधिक इस वृत्ति के पात्र सुप्रसिद्ध समाजसेवी श्री ज्योतिराव फुले हैं। वे इस समय पक्षाघात के कारण शैया पर भी हैं, अतः उन्हें यह सहयोग दीजिए। हालांकि सैद्धांतिक तौर पर फुलेजी से मेरा मतभेद है, किन्तु वे उच्च चरित्र के व्यक्ति है। आप उन्हें यह वृत्ति देकर एक आदर्श पात्र व्यक्ति का वृत्ति देने का उपकार कीजिए।’

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