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नरक – स्वर्ग

व्रजभाई ने श्रीमद् राजचन्दजी  ने पूछा – स्वर्ग-नरक क्या है?

उत्तर मिला – रात-दिन कलह का भाव ही भावनरक है, जिससे नरक गति मिलती है। धर्म की रुचि, विश्वमैत्री की भावना भाव-स्वर्ग है, इसीसे स्वर्गादि की प्राप्ति होती है। अतः वर्तमान में भी स्वर्ग-नरक देखना हो तो जीवो के परिणामों को देख लो। नरक-स्वर्ग आत्मा में ही होता है।

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