Short Stories

खुशी की बात

महात्मा बुद्ध का चचेरा भाई देवदत्त उन्हें हमेशा चिढ़ाता रहता था। एक दिन उसने बहुत ही खोटी खोटी गालियां दी।  महात्मा बुद्ध उन्हें सुनकर हँसते रहे।

देवदत्त ने कहा- गालियाँ सुनकर क्या बेशर्म की तरह हँस रहा है।

बुद्ध ने कहा – भाई, तू मुझे कुछ दे ही रहा है, कुछ ले तो नहीं रहा।  मनुष्य को अनायास कुछ मिले तो उसे खुश होना ही चाहिये।

देवदत्त चुप हो गया।

Share:

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *