Short Stories

मात्र ज्ञाता हूँ

एक नगर में ३० कुटुम्बियों का परिवार सुख शांति पूर्वक रहता है। सबकी अपनी अपनी दुकानें किन्तु एक साथ खते पीते रहते हैं। मैंने उनके वयोवृद्ध पिता से पूछा आपके पूत्र और सब घर के आपके बड़े आज्ञाकारी है। उन सज्जन ने उत्तर दिया – कोई किसी का आज्ञाकारी नहीं हैं। मैं किसी के काम में हस्तक्षेप नहीं करता, सबको देखता रहता हूँ और यही शिक्षा उनको देता रहता हूँ, जो हो रहा है उसे मात्र जानो। क्योंकि वही होने वाला था जो हो रहा है इसी नीति के कारण घर में सुख शांति है।

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