Short Stories

ज्ञान नहीं है!

जब सुकरात जेल मे विष का प्याला पीकर मरने को ही थे, एक शिष्यों ने पूछा – ’प्रभो, आपको नहलाकर, कफन ओढ़ा कर फिर कहाँ दफन करें?’
सुकरात मुस्कराकर बोले- ’शिष्यों ! अगर तुम पा सको, तो जहाँ चाहो दफना दो। लेकिन सोचता हूँ कि तमाम जिंदगी मैं स्वयं अपने आपको नहीं पा सका, तो तुम मेरी मृत्यु के बाद मुझे कैसे पा सकोगे? मैं इस तरह जिया हूँ कि अंतिम वक्त में मुझे यही लगता है कि अपने बारे में बाल बराबर भी ज्ञान नहीं है।’

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