Short Stories

मेहमान को वापस भेजने गये थे।

एक सत्य घटना है। एक धर्म प्रेमी सज्जन जिनेन्द्र भक्ति और स्वाध्याय में जाया करते थे, कभी भी उनकी अनुपस्थिति नहीं होती थी। एक दिन उनके लघुपुत्र की आकस्मिक मृत्यु हो गई, इसी कारण वे स्वाध्याय और भक्ति कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। वे दूसरे दिन आ सके। अतः उस दिन विद्वान प्रवक्ता ने पूछा-सेठ सा०, क्या बात है? कल प्रवचन में शामिल नहीं हो सके। उत्तर मिला-कल एक मेहमान को भेजने गये थे।

Share:

Leave a Reply

%d bloggers like this: