Short Stories

अच्छाई के फूल, बुराई के काँटे

क्रान्तिकारी विद्वान् पं॰ टोडरमल जी के आगम सम्मत विचारधारा का आगम रहस्य से शून्य होकर भी आगम की दुहाई देने वाले अनेक पंडितगण विरोध करते एवं अनेक प्रकार के झूठे लांछन लगा कर उन्हें सबकी दृष्टि में गिराना चाहते थे। किन्तु पंडित जी कभी किसी का कुछ भी प्रतिवाद नहीं करके कह देते – जाकी जितनी बुद्धि, उतनो देय बताय। वाको बुरो न मानिये और कहाँ से लाय। एक दिन एक विद्वान् ने पंडित जी की उपस्थिति में ही उनके मान्य सिद्धान्तों का एवं व्यक्गित रूप से बड़ा विरोध किया। यह सुनकर पंडित जी के एक भक्त ने कहा – पंडित जी! इतनी भरी सभा मे जब आपको इतना अपमानित किया गया, तब आपको भी तो इसका प्रतिवाद करना चाहिए। पंडित जी ने कहा, भाई! आपको यदि गुलाब की सुगंधी अच्छी लगती है तो फूल ही क्यों तोड़ते हो, काँटे भी तोड़ लेना चाहिए। इसी प्रकार मैंने उनकी प्रवचन शैली की अच्छाई लेकर कटुता के काँटे उन्हीं के पास छोड़ दिये।

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