Short Stories

घृणा पाप ही है

जेकस जितना धनी था, उतना ही अनाचारी और क्रूर था। उसकी टैक्स वसूली के समय लोग डरकर जंगलों मे जा छिपते। एक दिन ईसा उस नगर में आये, तब सभी जनता उनके दर्शनों को उमड़ पड़ी। कौतूहलवश जेकस एक वृक्ष पर चढ़कर ईसा को देखने लगा। ईसा ने उसे देखकर कहा – जेकस वहाँ कहाँ बैठे हो? मैं आज तुम्हारा ही अतिथि बनूँगा। इस पापी से प्रेम करते देखकर लोग ईसा की निंदा करने लगे। किन्तु ईसा को इसका क्या प्रयोजन? ईसा जेकस के घर पहुँचे और भोजन किया। यह देखकर जेकस पानी-पानी हो गया और बोला – स्वामी! आज मैं अपनी आधी सम्पत्ति गरीबों को देता हूँ तथा जिसका अन्याय से द्रव्य छीना है, उनको चौगुना वापस करने का वचन देता हूँ।

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