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चार वैद्य

सिंधु देश में एक बड़ा वैद्य रहता था। वह गरीबों का इलाज मुफ्त करता था। इसलिए सब लोग उसे बहुत चाहते थे। एक बार वैद्य स्वयं बहुत बीमार हुआ, उसे विश्वास हो गया कि अब वह बचेगा नहीं। छोटे बच्चों, बडों, औरतो और मर्दो सभी ने उसकी चारपाई को घेर लिया। उनकी आंखों मे आंसू बह रहे थे। अचानक वैद्य ने आंखे खोली और सबकी ओर देखकर कहने लगा, “आप लोग क्यों रो रहे हैं ?”

“हमें आप छोड़ कर जा रहे हैं? अब कौन हमारी बीमारी में देखभाल करेगा ?”

वैद्य ने कहा – “भाग्य की बात कोई नहीं टाल सकता। खैर! मैं आप लोगों के लिए चार वैद्य छोड़े जा रहा हूँ, जो हमेशा बिना कुछ लिए आपकी सेवा करेंगे।”

लोगों ने पूछा, “कौन हैं वे वैद्य?”

वैद्य ने जवाब दिया, ये चार वैद्य हैं,

  • पहला – नित्य सबेरे उठकर व्यायाम करना।
  • दूसरा – समय पर भोजन, दातुन करना,
  • तीसरा – रोज नहाना और
  • चौथा वैद्यों के कहने पर चलोगे, तो सदा स्वस्थ रहोगे।

इतना कहने के बाद वैद्य ने आँखें मूंद ली। वैद्य की मृत्यु के बाद लोग वैद्य की सलाह पर चलने लगे और वे बीमारियों से मुक्त हुए और स्वस्थ रहने लगे।

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