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भविष्य की चिन्ता

एक ज्योतिषी ने सेठजी का हाथ देखकर बताया कि आपकी किस्मत में इतना धन है कि दस पीढ़ी तक समाप्त नहीं हो सकता। इसे सुनकर सेठ रोकर कहने लगा। ज्योतिषी जी! यह तो तुमने बहुत बुरा भविष्य बतलाया। क्योंकि इसका तो यह मतलब हुआ कि हमारी ११ वी पीढ़ी भूखों मरेंगी। ज्योतिषी ने अपना दक्षिणा मँागी तो सेठ जी कहने लगे। क्या हमारी दशवी पीढ़ी को भी भूखों मारना चाहते हो तुम जैसे को दक्षिणा भक्षिणा नहीं मिलती। ज्योतिषी अपना सिर ठोककर चला गया। अब सेठ जी को ग्यारहवीं पीढ़ी की चिन्ता सताने लगी। मुनीम ने समझाया-सेठ जी ११ वीं पीढ़ी के लिए कुछ दान धर्म करना चाहिए। उसने कुछ अनाज लेकर ज्योतिषी के घर पहुँचाया। ज्योतिषी कहने लगा-आज मैं कुछ नहीं लूंगा क्योंकि मेरे घर आज भिक्षा में अनाज आ चुका है, कल की चिन्ता ही क्या है? किस्मत का लिखा मिल ही जाएगा। सेठ जी की आँखें खुल गयी कि मैं ग्यारहवीं पीढ़ी  की चिन्ता करता हूँ इसे कल की चिन्ता नहीं।

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