Short Stories

क्षमता समता है नहीं, फिर वह कैसा संत?

भक्त दर्शन करने के लिए साधु जी के पास पहुंचा। भक्त ने कहा – स्वामिन्, यहाँ-कहीं आग जल रही है, मुझे उसकी लौ दिख रही है। साधु महाराज ने कहा – यहाँ आग कहाँ से आई? भक्त बोला महाराज! मुझे धुआँ तो दिख रहा है। साधु जी बोले-भाई, क्या आँखे काम नहीं दे रहीं। भक्त बोला महाराज, अब तो उसकी लौ बढ़ गई है। साधु जी बोले-भाग यहाँ से पागल कहीं का। भक्त बोला – महाराज अब तो वह जोर से धधकने लगी। देखिये यह कषायाग्नि कैसी भड़क उठी है?

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