Short Stories

निर्भयता से हृदय परिवर्तन

गाँधी जी का सत्याग्रह आन्दोलन चल रहा था। ब्रिटिश सरकार उनके आन्दोलनों से तंग आ गई थी। एक अंग्रेज अधिकारी ने कहा – यदि गाँधी अभी मिल जाये तो मैं उसे गोली से उड़ा दूं। यह बात गाँधी जी के कानों में पहुँची। दूसरे दिन सबेरे ही गाँधी जी उस अंग्रेज के बंगले पर पहुँच गये। उस समय वह अंग्रेज सो रहा था। जगने पर उनकी भेंट हुई तो उन्होंने कहा – मैं गाँधी हूँ आपने मुझे मारने की प्रतिज्ञा की है। आपकी प्रतिज्ञा आसानी से पूरी हो सके इसलिए मैं अकेला ही चला आया हूँ। आप अपनी प्रतिज्ञा पूरी कीजिये। इतना सुनकर वह अंग्रेज पानी पानी हो गया और उनका भक्त बन गया।

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