Short Stories

विशाल हृदय

पाण्डवों को बनवास देकर कौरव खुशियाँ मना रहे थे। कौरव लोग खुशियाँ मनाने गंधर्वबाग को उपयक्त समझकर पहुँचे। गंधर्वो ने बाग में हानि होने की संभावना से उन्हें बाग में उत्सव मनाने को मना किया किन्तु कौरव नहीं माने। तब गंधर्व उन्हें रोकने को कटिबद्ध हो गये। यह सब देख अन्य कौरव तो भाग गये किन्तु उन्होंने दुर्योधन को पकड़ लिया। जब युद्धिष्ठिर को यह सूचना मिली तो उन्होंने कहा- हम घर में १०० और पाँच हैं किन्तु दूसरों को १०५ हैं। उन्होंने अर्जुन को भेजकर दुर्योधन को छुड़ा दिया।

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