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जोश और देरी !

सीता को पंचवटी में से रावण चुराकर ले गया। राम उसकी खोज करते रहे। जब राम को मालूम हुआ कि सीता लंका में है, तो उन्होंने सेनापति जामवन्त से प्रश्न किया कि ’लंका यहाँ से कितनी दूर है।’ जामवन्त ने मुस्कराकते हुए उत्तर दिया-’’जिसके जीवन में स्फूर्ति है, चेतना है, उसके लिए बहुत नज़दीक है और जिसमे चेतना का अभाव है उसके लिए लंका बहुत दूर है। इसलिए महाराज! लंका कितनी दूर है यह मत पूछिये, यह पूछिये कि हमारे में जोश कितना है?’’ जामवन्त के उत्तर ने जीवन के उस महान् रहस्य का उद्घाटन  कर दिया है कि कार्य की विशालता न देखो, किन्तु यह देखो कि आपके जीवन में तेज कितना है, यदि जीवन में तेज है ,साहस है तो कठिनतर कार्य भी सुगमतर है।

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