Short Stories

वह सम्राट् है या भिखारी

सिकन्दर महान् ने भारत में एक दिगम्बर साधु को देखकर कहा – जिस भारत को मैं सोने की चिड़िया समझता था, उस भारत में ऐसे लोग भी रहते हैं, जिन्हें अपने शरीर को ढकने को कपड़ा भी नसीब नहीं होता। अरे भाई! यदि मेरे देश में चलो, मैं तुम्हें मालामाल कर दूं।

मुनिराज बोले – जो स्वयं भूखा है, वह क्या दूसरे  का  पेट भर सकता है? जो खुद दरिद्र है, वह क्या दूसरे को माला-माल कर सकता है।

सिकन्दर बोला, जानते हो मैं विश्वविजयी सम्राट सिकन्दर महान हूँ? तुमने मुझे भूखा भिखारी समझ रखा है क्या?

साधु बोले- यदि तुम भूखे न होते तो अपना देश छोड़कर यहाँ क्यों लूटपाट करके अपना पेट भरने आते? वहाँ पेट नहीं भर सका, तभी तो परदेश में डाका डालने आयें हो। यह सुनकर सिकन्दर कुछ विचारमग्न होकर सोचने लगा कि सच क्या है?

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