Short Stories

ज्ञान का अजीर्ण

गौतम गणधर के आते ही भगवान महावीर की दिव्यध्वनि खिरने लगी। यह देखकर मुनि मस्करीपूर्ण को  बड़ा दुख हुआ कि मुझ जैसे भगवान पाशर््वनाथ के गणधर के प्रमुख शिष्य और 11 अंग के अधिकारी विद्वान् के होते हुए वाणी क्यों नहीं खिरी ?यह तो मेरा घोर अपमान है। ऐसा सोच कर उसने भगवान महावीर की निन्दा करना प्रारम्भ कर दी । ज्ञानमद क्या क्या अनर्थ नहीं करता है?

Share:

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *