Short Stories

आदर्श जीवन का प्रभाव

बंगाल के मल्लिक सैठ बड़े धर्म प्रेमी और सत्यवादी थे। एक बार वे चार जहाजों में माल भर कर जा रहे थे। राह में समुद्री डाकुओं ने धावा बोल कर सब जहाजों को लूट लिया। डाकू सरदार ने सैठ से पूछा- अब तुम्हारे पास और कुछ तो नहीं है। सेठ ने कहा – अब मेरे पास कुछ भी नहीं हैं। जब डाकू जाने लगे तो सेठ की नज़र अँगूठी पर गई। सेठ ने सोचा आज मैंने अनजाने में बहुत बड़ा झूठ बोल दिया। अँगूठी दस हजार की होगी। सेठ ने डाकू सरदार को बुलाकर अपनी भूल बताते हुए अँगूठी दे दी। सरदार कुछ देर तक कुछ सोचता रहा फिर उसने सेठ का सब माल वापस कर क्षमा मँागी और डाका डालने का त्याग कर दिया।

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