Short Stories

दृष्टि में दुःख

मैला चित्त ही कर्मो का संचय करता है वे बहुत दुखदाई होते हैं।

एक महिला ने पतीले में पानी भर कर उसे चूल्हे पर चढ़ा दिया थोड़ी देर बाद पानी उबलता हुआ कुछ आवाज करने लगा। महिला ने पूछा – भैया जल, तुम क्यों रो रहे हो? जल बोला-  बहन आग मुझे जला रही है। मुझ में वह ताकत है कि अगर में इस पर हमला कर दूं तो क्षण भर में यह ठन्डी हो जावे। मगर बीच में यह पीतल आवरण बन कर पड़ा है। इसीलिए मैं मजबूरी में दुःख भोग रहा हूँ। धर्मप्रेमी बन्धुओं – आत्मा पर भी बीच में कर्मो का आवरण पड़ा है इसीलिए आत्मा को विवश हो कर दुःख भोगना पड़ रहा है।

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