Short Stories

जैसी दृष्टि – वैसी सृष्टि

एक राजा एक पंसारी को देखकर उसके सादर वन्दना करने पर भी उससे घृणा ही करता था। राजा ने मंत्री से इसका कारण पूछा। मन्त्री ने राजा की सब बात पंसारी को बता कर पूछा – सच बताओ क्या बात है?
पंसारी ने कहा – “जान बख्शी जाय, राजा साहब पिछले दिनों मे बहुत बीमार हो गये थे। बचने की कोई आशा न रही। तब मैंने यह देखों चौदह मन चंदन खरीद लिया था। राजा साहब अच्छे हो गए तो चन्दन अब तक पड़ा है। एक बहुत बड़ी रकम खटाई में पड़ गई है।”
मन्त्री ने वह सब चन्दन बाजार भाव में उस से खरीद लिया। राजा फिर उस की दुकान के आगे आये मगर उसके हृदय में पंसारी के विरुद्ध भाव न हुए। राजा ने कारण मन्त्री से पूछा तो उसने कहा? जिस कारण से उसके हृदय में आपके विरुद्ध भाव होते थे और उन भाव के आकर्षण से आपके भाव मलिन हो जाते थे, मैंने उस कारण को ही अब मिटा दिया है।

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