Short Stories

सच्चे दानी

दीवान अमरचन्द जी लाखों दीन दुखियों को गुप्त सहायता पहुँचाया करते थे। एक बार रात को सुना कि एक गरीब ब्राह्मण मर गया है, किन्तु उस विचारी विधवा के घर में कल को भी खाने को नहीं है। तो गाड़ी में गेहूँ भर कर सोचा कि रात को किसी नौकर को क्यों जगाया जाय?  इससे स्वयं गरीब किसान का भेष बनाकर गाड़ी हाँकते हुए चलें। वहाँ से रात को राजा घोड़े पर बैठे आ रहे थे।

गाड़ी की आवाज सुन कर राजा ने कहा – ’’कौन?’ ’ये चुपचाप रहे तो राजा ने कहा – ये कोई चोर है तभी तो बोलता नहीं। सिपाही से कहा – ’’पकड़ लाओ इसे मेरे पास।’’ दीवान साहब चुपचाप राजा के सामने पहुँचे, तब राजा ने उजाला करके देख तो दीवान साहब ! राजा ने पूछा – दीवान साहब यह क्या तमाशा है? तब दीवान साहब ने सब हाल बताया। राजा ने गद्गद् हो कहा – तुमसे दाता देवगण, करते जहाँ निवास। उसी देश का रहेगा, अमर पुण्य इतिहास।

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