Short Stories

इस हाथ दे, उस हाथ ले

महाराज भोज के राजकवि गर्मी की प्रचण्ड धूप में कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक दुर्बल आदमी नंगे पैर कहीं जा रहा है और तेज गर्मी व धूप के कारण बहुत दुखी हो रहा है। न तो वह दुर्बल होने के कारण भाग पाता है और न कहीं छाया के अभाव में बैठ सकता है। राजकवि से उसका दुख न देखा न गया, उन्होंने अपने जूते उतारकर उसे पहनने के लिए दे दिये और आप स्वयं नंगे पैर चलने लगे। इतने में राजा का महावत कहीं से वापस आ रहा था। उसने राजकवि को नंगे पैर चलते देखा तो उनको तुरन्त हाथी पर बैठा लिया। इतने में सामने से महाराज भोज भी कहीं से रथ पर सवार होकर आ रहे थे, तो उन्होंने हंसी मे राजकवि से पूछा- “आपको हाथी कहाँ मिल गया?” राजकवि ने कहा – “टूटा जूता दिया दान में, जिसका यह परिणाम। मिला बैठने को यह हाथी, दान बड़ा शुभ काम।”

Share:

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *