Short Stories

अमृत को विष न बनाइये

मनुष्य को चाहिये कि वह धर्म को दंभ, घृणा, विवाद और खून खराबी का कारण न बनावें।

जो वस्तु अमृत बनाने के लिये है उसको विष नहीं बनाना चाहिये।

हमें उस भेंस के समान नहीं होना चाहिये। जो साफ पानी के तालाब में जाकर उसको मथ डालती है और गंदलाकर आनन्दानुभव करती हैं।

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