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साले बहनोई का धर्म प्रेम

56 करोड़ स्वर्ण मुद्राओं (दीनार) के धनी सेठ शालिभद्र और धन्ना सेठ में आपसी साले बहनाई का रिश्ता था ।एक बार शालिभद्र को वैराग्य हो गया, वे वन गमन को तैयार थे। किन्तु उनकी 32 पत्नीयों ने बत्तीस दिन का वचन लेकर रोक लिया। धन्नासेठ की पत्नी कनकश्री अपने भाई के वैराग्य का समाचार सुनकर उदास हो गई। धन्नासेठ ने पत्नी से उदासी का कारण जानकर कहा- “जब शालिभद्र को वैराग्य हो गया तो उसे रुकने की क्या आवश्कता थी?” कनकश्री बोली-“जब आपको वैराग्य हो जाएगा, तब शायद एक दिन भी नहीं रुकेंगे?” धन्नासेठ ने कहा- “एक दिन तो बड़ी बात है, एक घंटा भी रुकना बेकार है। आयु का क्या ठिकाना?”

अब क्या था धन्नासेठ घर से चल दिये। आश्चर्यचकित सब दुःखी होने लगे। धन्नासेठ ने शालिभद्र के घर जाकर कहा- “शालिभद्र! क्या तुम्हें अपनी आयु का भरोसा है, जो 32 दिन को रुक गये।” यह सुनकर शालिभद्र भी धन्नासेठ के साथ गुरुचरणों में जाकर दीक्षित हो गये। साले बहनोई को यह धमप्रेम धन्य है।

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