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सबसे बड़ा धर्म

कौरवों और पांडवों का युद्ध हो रहा था। दिन में लड़ाई होती थी, सूर्यास्त होने पर बन्द हो जाती थी। लड़ाई बन्द होते ही युधिष्ठिर चुपचाप वेश बदलकर युद्ध-क्षेत्र में जाकर घायलों की सेवा करते थे।

एक दिन सहदेव ने उन्हें वेश बदलते हुए देख लिया। संकोच के साथ पूछा, भ्राताश्री,  आप यह क्या कर रहे हैं? रूप क्यों बदल रहे हैं? क्या कहीं जा रहे है?

युधिष्ठिर ने उत्तर दिया, हाँ, मैं लड़ाई के मैदान में जा रहा हूँ। आश्चर्य से सहदेव ने पूछा, ’लड़ाई के मैंदान में? क्यों, वहाँ तो हमारे शत्रु हैं।’

युधिष्ठिर ने कहा, सहदेव, लड़ते हुए भी हमें धर्म की मर्यादा का पालन करना चाहिए। मानव की सेवा करना मानव का सबसे बड़ा धर्म है।

लेकिन सहदेव ने अगला प्रश्न किया, ’आप वेश क्यों बदलते है?’

युधिष्ठिर ने कहा, यदि मैं अपने असली रूप में जाऊँगा तो वे मेरी सेवा नही लेंगे। उसे ठुकरा देंगे।

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