Short Stories

देखा देखी

एक गधा जा रहा था। अंधेरा हो गया, वह रास्ता नहीं देख पा रहा था। एक वृक्ष पर उल्लू बैठा था। उसने कहा गर्दभराज, तुम रास्ते में भटक गये हो। मैं तुम्हें मार्ग बताऊँ? उल्लू गधे की पीठ पर आकर बैठ गया, दोनों चले जा रहे थे। गधे को अंधेरे में नहीं दिखता। उल्लू अंधेरे में ही देख पाता है।

चलते चलते प्रातःकाल हो गया। जैसे ही प्रकाश की किरण फूटी, उल्लू को दिखना बन्द हो गया। अब वह गधे का मार्गदर्शन कैसे करता? फिर भी वह गधे की पीठ छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। गधा चलता गया। गधा देख सकता था। किन्तु उसने मान लिया कि मेरा मार्गदर्शक उपस्थित है फिर मुझे देखने की आवश्यकता ही क्या है? एक स्थान पर गधा उल्लू के निर्देशानुसार मुड़ा। वहां नदी थी, दोनो नदी में बह गये। जो व्यक्ति दूसरों के देखा देखी चलता है, अंततः उसका यही हाल होता है।

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