Short Stories

दीन बन्धु

राजस्थान में सूखा पड़ जाने से अन्न की त्राहि-त्राहि मच गई। यह देखकर दीवान अमरचन्द जी ने बाहर से गेहूं मँगाकर एक कल्पित फर्म के नाम से सबको अन्न देना प्रारम्भ कर दिया। लोगों की जान में जान आ गई। अगले वर्ष फसल अच्छी आ जाने से किसान कर्जा चुकाने को तैयार हो गये, पर लेने वाली फर्म का पता भी नहीं था। आखिर सभी किसान अपनी अपनी गाड़ी वापस लाकर चुपचाप रह गए-

 

दीन दुःखी को लखकर जिसके बहती करूणा की धारा।

’दीन बन्धु’वह ’विष्व हितैषी’ महापुरूष ,जग का प्यारा।।

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