Short Stories

न मिटने वाले दाग

पुत्र किसी के घर में डाका डालकर आता तो माँ कमरे में एक कीला गाड़ देती। किसी का खून करता तो एक और गाड़ देती। यह सिलसिला न जाने कब तक चलता रहा। एक दिन पुत्र ने माँ से पूछा, “में तुमने सारा कमरा कीलों से भर दिया है। यह सब क्या है?”

“पुत्र यह तुम्हारे बुरे कर्म हैं। जब तू बुरा काम करता, मैं एक कील गाड़ देती थी। अब तो पूरा कमरा कीलों से भर गया है। पर……”

पुत्र का हृदय पश्चाताप से भर उठा। उस दिन से वह अच्छे काम करने लगे। हर दिन जब वह घर आता, माँ को अच्छे कर्म बताता, माँ एक कील उखाड़ देती। कई वर्षों तक ऐसा चलता रहा। एक दिन सभी कीलें उखड़ गई तब पुत्र ने शान से पूछा, “माँ, अब तो कोई पाप नहीं रहा ?” “बेटा! कीलें तो सभी निकल गई पर कीलों के न मिटने वाले दाग दीवार पर रहे गए है जो तुम्हारे बुरे कर्मो की हमेशा याद दिलाते रहेंगे, तुम्हें और अच्छे कर्मो की प्रेरणा देते रहेंगे।”

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