Short Stories

कौन किसको रोता है?

मिथिलानरेश महाराज नमिराज दीक्षा लेकर आत्मकल्याण करने के लिए वन में जाने को तैयार हुए तो रनवास में जोर जोर से रुदन और चीत्कार का कोलाहल होने लगा। तब सोधर्म इन्द्र ने नमिराज की परीक्षा करने के लिए विप्र बनकर कहा – राजन, आपके कारण ही ये सब परिजन पुरजन दुखी हो रहे हैं। इसमें आपको हिंसा का पाप नहीं लगेगा। नमिराज ने उत्तर दिया-विप्रवर! ये सब अपने राग और अपने सांसारिक सुखों को रो रहे है। मेरे लिए कोई नहीं रो रहा। सामने वृक्ष में गत वर्ष आग लगी थी, उस पर पक्षी फड़फड़ा रहे थे किन्तु वे सब अपने अपने सुखों के लिए तड़प रहे थे, वृक्ष के लिये नहीं। इन्द्र ने अपना रूप प्रगट कर क्षमायाचना की।

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