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2 comments

  1. Avatar
    Rinkesh Shah 29 October, 2016 at 17:21 Reply

    Gujarat state please add tarangaji siddh kshtra, pavagadh siddh kshetra, Umataji, Chintamani parshwanth bhiloda, Chaitanya Dham ( Ahmedabad To Himmatnagar NH 8 ) , bediaji Nr Pavagadh,

  2. Avatar
    Adarsh Kumar Jain 21 July, 2019 at 08:13 Reply

    आदरणीय श्रीमान,
    आचार-विचार व व्यवहार से मै समर्पित देश का नागरिक और अहिंसा के जैनधर्म का पालन करता आया हु मैंने आजतक किसी भी नियम का उल्घंन नहीं किया।
    ६५ वर्ष की आयु में अपने दायतव को पूर्ण करते हुए मैंने जिला करोली राजस्थान में स्तिथ अपने दिगंबर विशाल मंदिर जी के संचालन प्रमुख का पदभार सम्भाला था जुलाई २०१८, जहां ४५० कर्मचारी कार्यरत हैं, यहां पर फैले अव्यवस्था जो विकराल रूप में थी उसे अथक परिश्रम से व्यवस्थित किया और घाटे में चल रहे मंदिर ट्रस्ट में भी सुधर किया।
    इसी दौरान मंदिर सचिव व् कार्यरत ५ विशेष अधिकारिओं ने जो गत ४० वर्षो से एक ही पद से जुड़े थे इनसबने मिलकर उस भूमि से जिसे मंदिर राजयसरकार को २०१५ में दान क्र चूका था अगस्त के अंतिम सप्ताह में १८४ लहलहाते पेड़ों का दोहन कर १५ हज़ार प्रति पेड़ की दर से बिलरी भी कर दिए थे। इस विषय को तुरंत अध्यक्ष व् कार्यकारणी के सदस्य को सूचित किया गया, मुझे खामोश रहने को कहा गया की धर्मक्षेत्र की बदनामी होगी। उधर संघ के पूर्वाध्यक्ष के कहने पर आईने उस समय के जिलाधिकारी श्री अभिमन्यु जी से समय लेकर मिला उनको सम्पूर्ण तत्थ्यों की एक पूर्ण फाइल सौंप कर आया था सितंबर २०१८, के पहले सप्ताह में उस समय के थानाध्यक्ष व् पटवारी उपजिला हिण्डोन सिटी को लिखा गया। मगर इस धर्मसंघ जो गत ७० वर्षो से १३ गाँवो की जागीरदारी समाप्त के चलते इस सामंती ट्रस्ट को दी गयी। जिसके life time members are ex cJ of HC, Ex DGP of state, ex DIG Ex Addtl Cp Of Delhi plust top ex IAS of state and center.
    कहने को यह हम जैनिओं का प्रसिद्ध तीर्थ जबकि जागीरदारी हिन्दू समाज की थी, इसी के चलते आज भी मुख्यमन्दिर के बुलंददुआर के शीर्ष पर भगवान गणेश जी विद्यमान यह केवल एक मात्र प्रतिवाद है, देश विदेशों के तीर्थों में.
    जब मैंने एक भारतीय जैन होने के नाते इसका विरोध किया तो १९ अक्टूबर २०१८ को मुझसे त्यागपत्र लेकर मुझे २० को मुझे सेवामुक्त कर दिया गया बिना मेरी अर्जित तन्खा रूपये एक लाख चौंतीस हज़ार साथ ही पचास हज़ार वहां एक महिला परतीयक्ता ने धोके से गबन कर लिया त्यागपत्र वाले दिन.
    अपने गृहनगर गुरुग्राम लौटने के पश्चात मैंने ईमेल से NGT Delhi, Jaipur, PMO Hon, President, CJI of SCI, MHA, ASI, CMO Rajasthan Under Smt Vijaya Ji the Governer office etc with repeated reminder, जैसाकि इस संघ का शासन व्यवस्था में गहरी पैठ है चलते किसी भी प्रकार यहाँ तक की आरटीआई का भी कोईजवाब नहीं।
    इसके पश्चात मंदिर जी में कार्यरत पांच अधिकारिओं व् सचिव ने मिलकर मेरे विरुद्ध ४ वाद स्थानीय पोलिस से न्यायिक व्यवस्था से सांठगांठ करके २३ नवंबर से २४ दिसंबर के मध्य डाल दिए गए यहसब वो ही हैं जिनकी शिकायत मै पहले ही कर चूका था। इसके पश्चात इनकी और से जान की धमकी व लाखो की मांग आने लगी।
    इस बिच इनकी ज्यादितिओं की शिकायत मानवाधिकार आयोग से करी , जहाँ आयोग ने विवेचना का आदेश ५ मार्च को दिया और ६ मार्च २०१९ को वहां की स्थानीय पुलिस मुझे उठाकर लेगयी मुंसिफ अदालत ने भी मेरी गुहार नहीं और न्यायिक हिरासत देदी गयी, तब सेसन कोर्ट ने मुझे जमानत पर रिहाई दी ६ दिन के पश्चात,
    अब मेरे ४-४ केस राजस्थान में और हर २० दिन में ३०० किलोमीटर जाना और आना करना होता है उसपर वो सारा क्षेत्र भी इनका अतः वे कभी अपनी धमकी को किरयावन्न कर देंगे कहा नहीं जा सकता। इस सबके चलते मेरे दोनों पुत्र भी अपने परिवार को लेकर अलग हो गए इस डर के चलते, की मुझपर होने वाले आघात के चपेट से बच सके। अब केवल घर में मेरे साथ मेरे ६३ वर्षीय रुग्ण पत्नी ही बची है।
    उम्र के इस दौर में मैं यह सारे आघात सहने की इस्थिति में नहीं था अतः मैंने जयपुर व् चंडीगढ़ उच्चन्यालय की लीगल सहयता प्रकोष्ठ से संविधान की धरा २१ की तहत न्यायलय की अनुमति दिलवाने का अनुरोध किया की मे अपनी इच्छामृत्यु वर्ण कर संकु परन्तु दोनों ही जगह से नकारात्मक पर्तिकिर्या मिली की आज तक किसी भी नयायक अनुमति नहीं दी गयी है। अतः आप श्रीमंत से निम्न प्रतिवेदन है..
    अपनी इच्छामुर्त्यु से पूर्व जिन कारण से मुझे यह क़दम उठाना है आप के अधीन ग्रह मंत्रालय से आशा है की मुझे दिल्लीः के जंतरमंतर, जयपुर के प्रदर्शनीस्थल साथ ही जिला करोली के उस जैन तीर्थ के समीप मोन अनशन धरना पर बैठने की अनुमति, हर स्थल पर केवल पांच पांच दिन,
    मेरे आत्मवध के पश्चात मेरा शवविच्छेदन नहीं किया जाये शीघ्रताशीघ्र मेरे अंगो को मानवकल्याण हेतु देदीये जांवे और शेष शरीर को चिकत्सा अनुशंधान के लिए किसी भी उच्च संस्थान को देदिया जावे।
    शासन की जिन जिन संस्थानों ने कोई कदम नहीं उठाया उनके विरुद्ध भी न्यायोचित कार्यवाही,
    साथ ही जिनके प्रताड़ना के चलते मुझे जैसे देशभक्त अहिंसा धर्म के अनुयाई को यह कदम उठाना पड़ेगा उनके विरुद्ध विधि द्वारा कठोरतम कारवाही की जावे। मुझे क्षोभ है के शासन को जगाने के लिए मुझे अपने प्राणो की आहुति देनी होगी।
    मेरे गृहनगर गुरुग्राम की पुलिसप्रमुख को हिदायत दी जाये की मुझे व मेरी पत्नी को वरिष्ठ नागरिकों को दी जानेवाली सुरक्षा दी जाये हमारे शीघ्र प्राणांत करने तक।
    आपका अनुग्रहित आभारी,
    भवदीय,

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