Short Stories

क्या ऐसा समन्वय चाहते हैं?

शकल सूरत से सभ्य लगने वाले बदमाश रमेश ने सज्जन व्यक्ति सुरेश से १॰ रुपये का नोट छीन लिया। दोनों आपस में लड़ाई करने लगे तो भीड़ इकट्ठी हो गई। लोगों ने पूछा भाई, क्यों लड़ रहे हो? सुरेश कहने लगा-रमेश ने मेरे दस रुपय छीन लिये। रमेश ने कहा-सुरेश ने ही मेरे दस रुपये छीने हैं। जनता ने देखा तो रमेश के पास १॰ रुपये का नोट था। रमेश ने कहा-यह नोट तो मेरा है। कुछ पंचो ने न्याय दिय-अच्छा रमेश से नोट लेकर इन दोनों को पाँच-पाँच रुपया बाँट दो। एक विज्ञ पुरुष ने कहा-इस न्याय से तो नोट छीनने वाला लाभ में रहा और जिसका छीना गया वह घाटे मैं रहे । एक विचारक पूछता है कि निश्चय और व्यवहार को धर्म का आधा-आधा हिस्सा देकर आज क्या ऐसे समन्वय की बात नहीं कही जा रही हैं।

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