एक बार मनु नाव में वेद रखे हुये जा रहे थे कि समुद्र मे तूफान आ गया। तूफान शान्त हुआ, तो उन्होंने देखा एक बड़ी मछली उनके नाव को सहारा दिये खड़ी है मनु ने विनीत भाव से पूछा- “आपने ही मेरी रक्षा की, आप कौन है?”
मत्स्य दिव्य देव रूप में प्रकट होकर बोले- “वत्स! तूने ज्ञान की रक्षा का व्रत लिया, इसलिये तेरी सहायता करने के लिये मुझे स्वर्ग से आना पड़ा।”
धर्म जीव का रक्षक है। उस पर कृपा बरसाने हेतु प्रकृति सदैव उद्यत रहती है।

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