Short Stories

एक चोट ज्ञान की

शंकराचार्य गंगा स्नान को जा रहे थे। सामने एक चाण्डाल आ गया तो आचार्य ने कहा – ’दूर हट’।

चाण्डाल ने कहा – “आप शरीर को दूर हटाना चाहते हैं तो सभी शरीर मल मूत्रादि के घर हैं, तब सभी अशुद्ध हैं। और प्रत्येक आत्मा में परमात्मा हैं तब परमात्मा से हटने की बात आप जैसे विद्वानों के मुँह से शोभा नहीं देती। बोलिये किसे हटाना चाहते हैं?”

यह सुनकर उन्हें एक झटका लगा। कहते हैं इसी से उन्हें बोध उत्पन्न हो गया था।

Share:

Leave a Reply

%d bloggers like this: