Short Stories

Short Stories regarding Philosophical concepts, motivation, great persons
Stories taken from Sanmati Sandesh (an earlier monthly Jain Magazine)

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अर्घावतारन असिप्रहारन में सदा समता धरन

महाराज श्रेणिक ने धर्म विद्वेषवश यशोधर मुनिराज के गले में एक मरा हुआ सर्प डाल दिया और राजभवन में जाकर ...
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विकार की पतन है

वह धर्मात्मा गृहस्थ मुनिराज के पास बैठा धर्मोंपदेश सुन रहा था, उसे अपने आत्म संयम पर बड़ा गौरव था। उसी ...
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निमित्त उपादान में कुछ नहीं करता

एक मुनिराज विहार करते हुए नगर के पास से जा रहे थे। इतने में एक भक्त उनको देखकर चरणों में ...
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शरणागत की रक्षा

भगवान शांतिनाथ अपने पूर्व भव में मेघरथ नाम के राजा थे। एक दिन राजा मेघरथ राजसिंहासन पर बैठे हुए थे। ...
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तत्वज्ञानी का विश्वमैत्री भाव

आचार्यकल्प पं॰ टोडरमल जी एक प्रतिभाशाली असाधारण विद्वान तो थे ही किन्तु साथ ही अलौकिक महापुरुष भी थे। इनकी विद्वत्ता ...
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आत्मा का रोग – राग – द्वेष – मोह

सनतकुमार चक्रवर्ती का शरीर बहुत सुन्दर था, देवों की सभा में उनकी सुन्दरता की चर्चा हुई। दो देव उनकी सुन्दरता ...
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सच्ची भविष्यवाणी

एक सेठ बहुत धनवान थे। उन्हें धन का बहुत घमंड था। एक दिन वे मुनिराज को पास पहुंचे और नमस्कार ...
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जैसी दृष्टि-वैसी सृष्टि

बाप बेटे दोनों एक आम्र वृक्ष के पास से होकर चले जा रहे थे। वहां किसी आदमी ने एक पत्थर ...
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जैसी प्रकृति, वैसी नियति

एक ज्योतिषी से किसी व्यक्ति ने अपने तीन बच्चों का भविष्य पूछा, उसने पत्र के पन्ने पलटते रहने के बहाने ...
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देखा देखी

एक गधा जा रहा था। अंधेरा हो गया, वह रास्ता नहीं देख पा रहा था। एक वृक्ष पर उल्लू बैठा ...