Short Stories

भारी नहीं , भाई है

एक बिशप पहाड़ी पर चढ़ रहा था। उसी समय छह-सात वर्ष की एक लड़की अपने दो साल के भाई को कन्धे पर बैठाकर पहाड़ी पर चढ़ रही थी। वह हाँफ  रही थी। यह देखकर बिशप ने उससे कहा- ’अरे यह लड़का तो तेरे लिए बहुत भारी है।’ लड़की ने तुरन्त जवाब दिया, जरा भी भारी नहीं, यह तो मेरा भाई है। और वह फिर पहाड़ी पर चढ़ने लगी। यह घटना पढ़कर गांधी जी ने गोविन्द राघव को लिखा – कितना महान् विचार है यह भारी नहीं यह तो मेरा भाई है। भारी से भारी वस्तु भी पंख जैसी हल्की हो जाती है। यदि सच्चा प्रेम उसे उठाने वाला हो।

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