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बोली से बड़प्पन की पहचान

जंगल में राजा, मंत्री और सिपाही ये तीनों घोडों को दौड़ाते-दौड़ाते अलग-अलग बिछुड़ गये। रास्ते में एक नेत्रहीन किसान मिला। उससे राजा ने पूछा-क्यों सूरदास जी! यहाँ से मंत्री और सैनिक गये हैं। उत्तर मिला-महाराज, यहाँ से अभी कोई नहीं निकला।
राजा आगे चले गये। इतने में मंत्री ने आकर पूछा – क्यों सूरदास! क्या यहां से कोई राजा गये हैं। उत्तर मिला – मंत्री जी! गये हैं।
इतने में सिपाही ने आकर पूछा – क्यों बे अन्धे! यहाँ से राजा और मंत्री गये है क्या? उत्तर मिला – हाँ सिपाही जी! आगे जाकर तीनों मिल गये। वापस आते समय राजा ने पूछा – सूरदास जी आपने कैसे जाना कि ये राजा, मंत्री और सिपाही हैं।
सूरदास ने कहा – आप लोगों की बोली (संबोधन) से।

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