Short Stories

नौका जहाँ की तहाँ

कुछ यात्री नाव पर बैठ गए। वे नदी पार करना चाहते थे। नाविक नशे मे चूर था। वह जोर जोर से नाव खेने लगा। किन्तु घन्टों खेने के बाद भी जब यात्रियों ने पूछा-भाई नाविक! अभी कितनी नदी और पार करना शेष है। नाविक ने जब पीछे की और देखा तो नाव रस्सी से बंधी हुई वहीं की वहीं खड़ी थी। क्योंकि रस्सी तो खोली ही नहीं थी। यह देखकर वह अवाक् रह गया। जिस प्रकार यदि दृष्टि राग की उपादेयता से बँधी है तो बाह्य चारित्र का महान् पुरुषार्थ करके जीवन नौका संसार समुद्र से कभी पार नहीं हो सकता।

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