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भूल का एहसास

युनान का एक जमींदार महात्मा सुकरात के सामने अपने वैभव की गर्व से बड़ाई कर रहा था। कुछ समय तक सुकरात चुप रहे। तदनन्तर विश्व का एक नक्शा मंगाया और पूछा कि इसमें यूनान कहाँ है? यनान एक बिन्दु भर भी नहीं था। फिर सुकरात ने उस जमींदार की जागीर बताने के लिए कहा।

जमींदार ने उत्तर दिया – जब युनान का अस्तित्व  भी नगण्य है तो मेरी जागीर कहाँ दिखाई देगी?

इस पर सुकरात बोले – अरे भोले इन्सान! तू जिस वैभव का बखान करते करते थकता नहीं, उसका अखिल ब्रह्माण्ड में क्या पता लगता है ?

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