Short Stories

भेदविज्ञानी को कष्ट कैसा?

वही सुकुमाल जिन्हें मखमली गद्दों पर एक राई का दाना चुभ रहा था, दिये के प्रकाश में आँसू आ गये थे, उन्हें ही चौबीस घण्टे स्यालनी खाती रही फिर भी नहीं डिगे, आश्चर्य है! स्वामिन्, ऐसा कैसा हो गया? एक भोले प्राणी ने जिज्ञासा प्रगट की।
मुनिराज ने कहा-’भव्यात्मन्! देखो कच्चे हरे नारियल को तोड़ोगे तो भीतर बाहर का हिस्सा एक साथ टूट जाएगा। किन्तु पके नारियल को फोड़ोगे तो ऊपर की खपट्टी फूट जायगी किन्तु भीतर के भाग का कुछ नहीं बिगड़ेगा। इसी प्रकार जिसने भेदविज्ञान से आत्मा और शरीर अलग जान लिया, शरीर नष्ट होने पर उसका क्या बिगड़ता है? समुचित समाधान पाकर शिष्य संतुष्ट हो गया।

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