Short Stories

जो कुछ लिखा भाग्य में

श्री आचार्य शान्तिसागर महाराज जब गृहस्थ थे, तब वे खेती करते थे। इनका नाम शातगौडा था। दूसरे कृषकगण अपने खेत में से पक्षी भगाने के लिय मचान बनाकर उस पर बैठ पक्षी भगाते रहते थे, किन्तु वे कभी भी नहीं भगाते थे तथा उनको पीने को पानी भी रख देते थे। फिर भी इनका सभी के अनुपात से अच्छा अन्न निकलता था। लोग कहते हैं कि आप पक्षी भगा दिया करें तो आपको और भी लाभ हो सकता है । शातगौडा ने कहा-

जो कुछ लिखा भाग्य में, मेरा उतना तो मिल जाता है।
कम बढ़ कभी नहीं मिल सकता फिर जग क्यों ललचाता है?

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