Short Stories

भाग्य से मिलता है

एक सज्जन परदेश जाने लगे उन्होंने अपनी पत्नी से कहा- “तुम्हारे लिए खाने पीने का कितना सामान रख जाऊँ ?”

“जितनी मेरी आयु हो ” कह कर पत्नी हँस पड़ी।

“तुम्हारी आयु जानना, मेरे बस की बात नहीं।”

“तब तो मेरी रोटी का इंतजाम करना भी आपके बस के बाहर है। जिस भाग्य से अभी तक खाती रही हूँ  वही भाग्य हमेशा देता रहेगा। सभी अपने भाग्य का खाते हैं।”

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