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छटी शती का भारत

चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में चीनी यात्री फाह्यान ने भारत की यात्रा कर अपने संस्मरण में लिखा है – “भारत में सर्वत्र साधुओं का विचरण होता था, जिनमें बहु भाग नग्न (दिगम्बर) साधु होते थे। प्रजा सुखी और धनी थी। लेन-देन की लिखा पढ़ी कुछ नहीं होती थी। राजा प्राणदण्ड नहीं देता था। सारे देश में कोई अधिवासी जीव हिंसा न करता था, न मद्य पीता था और न लहसुन प्याज खाता था। जनपद में कोई सुअर या मुर्गी नहीं पालता, न जीवंत पशुओं को बेचता। केवल चाण्डाल ही मछली मारते, शिकार करते और मांस बेचते थे, वे चाण्डाल लोग नगर से बाहर रहते थे।” लहसुन प्याज का निषेध सिर्फ जैनधर्म में ही है। अतः उन दिनों जैनधर्म का कितना प्रभाव था, आश्चर्य!

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