Short Stories

जैसी प्रकृति, वैसी नियति

एक ज्योतिषी से किसी व्यक्ति ने अपने तीन बच्चों का भविष्य पूछा, उसने पत्र के पन्ने पलटते रहने के बहाने उन बच्चों की गतिविधियां गौर से देखी। पिता ने तीनों बच्चों को एक एक केला दिया। पहले बच्चे ने छिलका सड़क पर फेंक दिया। दूसरे ने उसे कूड़ेदान में डाला, तीसरे ने गाय को खिला दिया। तीनों बच्चो में से ज्योंतिषी ने एक को मूर्ख, दूसरे को समझदार और तीसरे को उदार बनने की घोषणा की। इसका कारण पूछे जाने पर ज्योतिषी ने पत्रों के पन्ने की अपेक्षा तात्कालिक प्रतिक्रियाओं को महत्त्व दिया, उसने कहा, मनुष्य की प्रकृति जैसी होती है, वैसी ही नियति बन जाती है।

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