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सुन्दरता रूप से या गुण से

कालिदास का काव्य सुनकर एक राजा बहुत प्रसन्न हुआ। राजा ने कहा-कवि कालिदास की बुद्धि जितनी सुन्दर है यदि रूप भी इतना सुन्दर होता तो सोने में सुहागा की भक्ति  चरितार्थ होती। राजा की यह बात कालिदास को खटक गई।

कालिदास एक दिन उस राजा के पास पहुँचे और राजा से पीने के लिए पानी माँगा। तत्काल सोने के गिलास में ठंडा पानी आ गया। कवि ने पानी पीकर एक गिलास पानी और माँगा। राजा ने फिर पानी मँगा दिया। कालिदास उस सोने के गिलास की बड़ी प्रशंसा  करते रहे। इस प्रकार की बातचीत में आधा घंटा  बीत गया, तब तक गिलास का पानी गर्म हो गया। कालिदास ने गिलास को उठाते हुए कहा-गिलास तो सुन्दर और सोने का है किन्तु पानी को तो गर्म कर दिया,  इससे तो मिट्टी का घड़ा अच्छा, जो पानी को ठंडा तो रखता है। बतलाईये,  सुन्दरता रूप से है या गुण से? राजा को सब कुछ समझ में आ गया।

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