Short Stories

आत्म जागरण

सिंह हिरन को खाने के लिए दबोच ही रहा था कि इतने कें दो चारणमुनि आकाश से गमन करते हुए निकले। उन्होंने अपने दिव्यज्ञान से जाना कि यह सिंह का जीव तो आगे जाकर तीर्थंकर होनेवाला है, वही आज अपनी शक्ति को भूलकर इस तरह पाप करने पर उतारू है। उसी समय उन्होंने जोर से पुकारकर कहा – “हे भगवान आत्मा! तुम तो विश्व  के कल्याण कर्ता तीर्थंकर  बनने वाले हो। फिर आज यह क्या कर रहे हो? तुम्हारी आत्मा में तो अनन्त शक्ति है, तब आज इस खोटे कर्म पर क्यों उद्यत हो रहे हो?” यह सुनकर सिंह का पंजा जहाँ का तहाँ रुक गया और उसकी दृष्टि अंतमुर्ख  हो गई। अब उसका जीवन बदल चुका था। यही सिंह दसमें भव में जाकर भगवान महावीर बन गया।

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