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अत्याचार सहना भी पाप

मौर्य साम्राज्य के अन्तिम सम्राट् बृहद्रथ को धोखे से मारकर जब उनका सेनापति पुष्यमित्र मगध का समा्रट बनकर साम्प्रदायिक नशे में अन्धा होकर श्रमण साधुओं पर अत्याचार करने लगा और उसने घोषणा की कि जो भी एक श्रमण साधु का सिर लाकर देगा, उसे सौ दीनार पारितोषिक में दी जाऐगी। तब यह समाचार सुनकर कलिंग (उड़ीसा) सम्राट् खारवेल ने उस पर चढा़ई कर दी। तथा पुष्पमित्र के अत्याचार बंद कर देने की प्रतिज्ञा लेने पर और प्राणों की भीख माँगने पर ही उसे चरणों में झुकाकर छोड़ दिया। क्योंकि अत्याचार करना व समाज पर अत्याचार सहना भी गृहस्थ के लिए सबसे बड़ा पाप है।

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