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एक बादशाह की जनता से अपील

यह उचित नहीं की मनुष्य अपने उदर को पशुओं की कबर बनाये। माँस के सिवा और कोई भोजन न होने पर भी बाज को माँस भक्षण का दण्ड अल्पायु मिलता है, तो मनुयों को जिसका भोजन माँस नहीं, माँस भक्षण का क्या दण्ड मिलेगा? कसाई आदि जीव हिंसा करने वाले जब शहर से बाहर रहे तो माँस भक्षण करने वालों को आबादी में अन्दर रहने का क्या अधिकार है? मेरे लिये कितने सुख की बात होती, यदि मेरा शरीर इतना बड़ा होता कि माँसाहारी केवल मेरे शरीर को ही खाकर सन्तुष्ट होते और दूसरे जीवों की हिंसा न करते ।

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